नितीश सरकार ने विज्ञापन दिया है. इन्होने आई टी के क्षेत्र में बहुत सारे काम किया है. इन्होने दावा किया है लोगो के देहली तक e-Governance की सेवाओं को पहुँचाने का काम किया है. इन्हें आईटी के क्षेत्र में एवार्ड भी मिले है जो कि सच में काबिले तारीफ है. लेकिन मैं नितीश सरकार से पूछना चाहता हूँ कि वसुधा केन्द्र भी तो आईटी का ही एक अंग है. फिर क्यों इन्होने वसुधा केन्द्र को तोड़ने का काम किया? क्यों नहीं वसुधा केन्द्र के माध्यम से आम आवाम को सुविधा मुहैया कराइ गयी? प्रत्येक पंचायत में जब एक वसुधा केन्द्र कार्य कर रहा तो क्यों किसी अन्य एजेंसी को इन सभी कामों में लगाया जा रहा है? एक तरफ कहते हैं कि मैंने इतनो को रोजगार दिया है. हमने भी रोजगार का एक अवसर अपनाया लेकिन नितीश सरकार ने हमें रोजगार से वंचित रखा. हमें अपना काम नही दिया और न ही करने का अवसर दिया. वसुधा केन्द्र की उपेक्षा करके इन्होने लगभग 8000 पढ़े लिखे युवाओं को रोजगार रहते हुए बेरोजगार कर दिया. इतने लोगो के परिवार वाले सरकार से काफी कुछ आस लगाये बैठे हैं. वसुधा केन्द्र के संचालक लगभग पांच वर्षो से अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं. जब इन्हें काम नहीं दे सकते हैं तो प्रोजेक्ट को बंद कर दिया जाना चाहिए. यदि प्रोजेक्ट बंद हो जाती है तो कम से कम वसुधा केन्द्र संचालक को यह तो लगेगा कि चलो प्रोजेक्ट ही बंद हो गया. कुछ दूसरा व्यवसाय करते हैं, यहाँ अगर नहीं गुजारा हो रहा है तो कही अन्य जाके कोई अन्य काम करते हैं.
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